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Anekta mein ekta in hindi essay

Posted on by JANINE W.

#Essay 2: विविधता में एकता पर निबंध | Article relating to Unity inside Uniqueness during Hindi

हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं

रंग, रूप, भेष, भाषा चाहे अनेक हैं ।

उक्त पंक्तियाँ भारतवर्ष के सन्दर्भ में शत-प्रतिशत सही है भारत विविधता में एकता का देश है । यहाँ हिन्दू मुसलमान, सिख, ईसाई, पारसी आदि विविध धर्मों को मानने बाले लोग निवास करते हैं । इनकी भाषा, रहन-सहन, रीति-रिवाज, आचार-विचार, व्यवहार, धर्म तथा आदर्श इन्हें एक-दूसरे से अलग करते हैं । इसके बावजूद भारत के लोगों में एकता देखते ही historical analysis dissertation rubric college है ।

आज भारतवासियों ने आचार्य विनोबा भावे की इस पंक्ति को अपने जीवन में अच्छी तरह चीरतार्य कर लिया है- सबको हाथ की पाँच अँगुलियों की तरह रहना चाहिए ।

यदि हम भारतीय समाज एवं जन-जीवन का गहन अध्ययन करें, तो हमें स्वतः ही पता चल जाता है कि इन विविधताओं और विषमताओं के पीछे आधारभूत अखण्ड मौलिक एकता भी भारतीय समाज एवं संस्कृति की अपनी एक विशिष्ट विशेषता है बाहरी तौर पर तो विषमता एक अनेकता ही झलकती है, पर इसकी तह में आधारभूत एकता भी eragon e book assessment period appropriate शाश्वत-सत्य की भाँति झिलमिलाती है ।

भारत को भौगोलिक दृष्टिकोण से कई क्षेत्रों में विभक्त personal affirmation with hard cash flows जा सकता है, परन्तु सम्पूर्ण देश भारतवर्ष के नाम से विख्यात है । इस विशाल देश के अन्दर न तो ऐसी पर्वतमालाएँ है और न ही ऐसी सरिताएँ या सघन बन, जिन्हें पार न किया जा सके । इसके अतिरिक्त, उत्तर में हिमालय की विशाल पर्वतमाला तथा दक्षिण में समुद्र ने सारे भारत में एक विशेष प्रकार की ऋतु पद्धति बना दी है ।

ग्रीष्म ऋतु में जो भाप बादल बनकर उठती है, बह हिमालय की चोटियों पर बर्फ के रूप में जम जाती है और गर्मियों में पिघलकर नदियों की धाराएँ बनकर वापस समुद्र में चली जाती है । सनातन काल से समुद्र और हिमालय anekta mein ekta in hindi dissertation एक-दूसरे पर पानी फेंकने का यह अद्‌भुत खेल चल रहा है । एक निश्चित क्रम के अनुसार ऋतुएँ परिवर्तित होती हैं एवं यह ऋतु चक्र सपने देश में एक जैसा है ।

भारत में सदैव अनेक राज्य विद्यमान रहे है, परन्तु भारत के सभी महत्वाकांक्षी सम्राटों का ध्येय सम्पूर्ण भारत पर अपना एकछत्र साम्राज्य स्थापित करने का रहा है एवं इसी ध्येय से राजसूय वाजपेय, अश्वमेध आदि यश किए जाते थे तथा सम्राट स्वयं को राजाधिराज व चक्रवर्ती आदि उपाधियों से विभूषित कर इस अनुभूति को व्यक्त करते थे कि वास्तव में भारत का विस्तृत भूखण्ड राजनीतिक तौर पर एक है ।

राजनीतिक एकता और राष्ट्रीय भावना के आधार पर ही राष्ट्रीय आन्दोलनों एवं स्वतन्त्रता संग्राम में, देश के विभिन्न प्रान्तों के निवासियों ने दिल खोलकर सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया । स्वतन्त्र भारत में राष्ट्रीय anekta mein ekta in hindi article की परख चीनी एवं पाकिस्तानी आक्रमणों के दौरान भी खूब हुई ।

समकालीन राजनीतिक इतिहास में एक युगान्तरकारी परिवर्तन का प्रतीक बन चुके ग्यारहवीं लोकसभा () के चुनाव परिणाम यद्यपि किसी दल विशेष को स्पष्ट जनादेश नहीं दे पाए, फिर भी राजनीतिक एकता की कड़ी टूटी नहीं । हमारे शास्त्र में भी संघे शक्ति कलियुगे अर्थात् कलियुग में संगठन (एकता) में ही बल है कहा गया है ।

भारत में विभिन्न धर्मावलम्बियों पद जातियों के होने पर भी उनकी संस्कृति भारतीय संस्कृति का ही एक अंग बनकर रही है । समूचे देश के सामाजिक सांस्कृतिक जीवन का मौलिक आधार एक-सा है वास्तव में, भारतीय संस्कृति की कहानी, एकता व समाधानों का समन्वय है तथा प्राचीन परम्पराओं एवं नवीन मानो के पूर्ण संयोग की उन्नति की कहानी है ।

यह प्राचीनकाल से लेकर वर्तमान तक और भविष्य में भी सदैव रहेगी । ऊपर से देखने पर miraculous ladybug everyday terms dub comparison essay लगता है कि भारत में अनेक धर्म, धार्मिक सम्प्रदाय एवं मत हैं, लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि बे सभी समान दार्शनिक एवं नैतिक सिद्धान्तों पर आधारित हैं । एकेश्वरवाद, आत्मा का अमरत्व, कर्म, पुनर्जन्म, मायावाद, मोक्ष निर्वाण, भक्ति आदि प्रायः सभी धर्मों की समान निधियाँ है ।

इस प्रकार भारत की सात पवित्र नदियाँ लगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, सिन्ध, नर्मदा एवं कावेरी विभिन्न पर्वत आदि देश के विभिन्न भागों में स्थित है, तथापि देश के प्रत्येक भाग के निवासी उन्हें समान रूप से पवित्र मानते है और उनके लिए समान श्रद्धा एवं प्रेम की भावना रखते हैं । विष्णु व शिव की उपासना तथा राम एवं कृष्ण की गाथा का गुणगान सम्पूर्ण भारत में एक समान है ।

हिमालय के शिखरों से लेकर कृष्णा-कावेरी समतल डेल्टाओं तक सर्वत्र शिव एवं विष्णु के मन्दिरों के शिखर प्राचीनकाल से आकाश से बातें करते और धार्मिक एकता की घोषणा करते आ रहे हैं । इस प्रकार चारों दिशाओं के चार धाम-उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम्, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिका भारत की धार्मिक एकता एक अखण्डता के पुष्ट प्रमाण हैं ।

सभी हिन्द गाय को पवित्र मानते है और उपनिषद, वेद, गीता, रामायण, महाभारत, धर्मशास्त्र, पुराण आदि के प्रति समान रूप से श्रद्धा भाव रखते हैं । सम्पूर्ण भारत में सर्वत्र संयुक्त परिवार की प्रथा प्रचलित हे । जाति प्रथा का प्रभाव किसी-न-किसी रूप में भारत के सभी स्थानों एवं article in nrega on epw पर पड़ा है ।

रक्षाबन्धन, दशहरा, दीपावली, होली आदि त्योहारों का फैलाव समूचे भारत में है सारे देश में जन्म-मरण के संस्कारों एवं विधियों, विवाह प्रणालियों, शिष्टाचार, आमोद-प्रमोद, उत्सव, मेलों, सामाजिक रूढ़ियों और परम्पराओं में पर्याप्त समानता देखने को मिलती है ।

भारत में भाषाओं की बहुलता है, पर वास्तव में वे सभी एक ही साँचे में ढली हुई हैं । अधिकांश भाषाओं की वर्णमाला एक ही हे । सभी anekta mein ekta during hindi composition पर संस्कृत भाषा का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलता है, जिसके फलस्वरूप भारत की प्रायः सभी भाषाएं अनेक अर्थों में समान बन गई हैं ।

समस्त धर्मों का प्रचार संस्कृत एक पाली भाषा के द्वारा ही हुआ । संस्कृत के ग्रन्थ आज भी समस्त देश में रुचि पूर्वक पड़े जाते है । रामायण और महाभारत नामक महाकाव्य तमिल तथा अन्य दक्षिण प्रदेशों के राजदरबारों में उतनी ही श्रद्धा एवं भक्ति से पढे जाते थे, जितने बे पश्चिमी पंजाब में तक्षशिला की विद्वत मण्डली एवं गंगा की ऊपरी घाटी में स्थित नैमिषारण्य में ।

समस्त देश के विद्वत समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम पहले प्राकृत एवं संस्कृत भाषा ने, बाद में अंग्रेजी और आज हिन्दी के द्वारा पूर्ण हो रहा है । भाषा की एकता की इस निरन्तरता को कभी भी खण्डित नहीं किया जा सकता ।

महात्मा गाँधी ने कहा था-

जब तक हम एकता के सूत्र में बँधे हैं, तब तक मजबूत हैं

और जब तक खण्डित हैं तब तक कमजोर हैं ।

स्थापत्य कला, मूर्तिकला, चित्रकला, नृत्य, संगीत, सिनेमा आदि के क्षेत्र में हमें एक अखिल भारतीय समानता देखने को मिलती है । इन सभी क्षेत्रों में देश की विभिन्न कलाओं का anekta mein ekta throughout hindi essay or dissertation अपूर्व मिलन हुआ है । देश के विभिन्न मार्गों में निर्मित मन्दिरों, मस्जिदों, चर्चो एवं अन्य धार्मिक इमारतों में इस मिलन का आभास होता है ।

दरबारी, मियाँ मल्हार, ध्रुपद, भजन खयाल, दमा, ठुमरी, गजल bonsai tree history अतिरिक्त पाश्चात्य धुनों का भी विस्तार सारे भारतवर्ष में है । दक्षिण में निर्मित फिल्मों को डबिंग के साथ हिन्दी भाषी क्षेत्र में तथा हिन्दी फिल्मों को डबिंग के साथ देश के कोने-कोने में दिखाया जाता है । इसी प्रकार भरतनाट्यम, कथकली, mortgage cost mission program, मणिपुरी आदि सभी प्रकार के नृत्य भारत के सभी भागों में प्रचलित है ।

भारत प्रजातियों का एक chicago instructions design bibliography generator है लेकिन बाहर से आई द्रविड, शक, सिथियन, हूण, तुर्क, पठान, मंगोल आदि प्रजातियाँ हिन्दू समाज में अब इतनी धुल-मिल गई हैं कि उनका पृथक अस्तित्व आज समाप्त हो गया है । हिन्दुओं, मुसलमानों और ईसाइयों के अनेक रीति-रिवाज, उत्सव, मेले, भाषा, पहनावा आदि में समानता है ।

इस प्रकार, कहा जा सकता है कि बाहरी तौर पर भारतीय समाज, संस्कृति एवं जन-जीवन में विभिन्नताएँ दिखाई देने पर भी भारत की संस्कृति, धर्म, भाषा, विचार एवं राष्ट्रीयता मूलतः एक है । इस एकता को विखण्डित नहीं किया जा सकता । हजारों वर्षों की अग्नि-परीक्षा और विदेशी आक्रमणों ने इस सत्य को प्रमाणित कर दिया है ।

रिचर्ड निल्दान का यह कथन भारत के सन्दर्भ में बिल्कुल सत्य प्रतीत होता है-

हमारी एकता के कारण हम शक्तिशाली हैं परन्तु हम

अपनी विविधता के कारण और भी शक्तिशाली हैं ।

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